shayri ki dairy best hindi love shayri मोहब्बत का एहसास तो हम दोनों को हुआ था फर्क सिर्फ इतना था की उसने किया था और मुझे हुआ था
“मैंने अपने मन से कहा, ‘चल, मैं तुझ को आनन्द के द्वारा जाँचूँगा।’…मैंने मन में सोचा कि किस प्रकार से मेरी बुद्धि बनी रहे और मैं अपने प्राण को दाखमधु पीने से किस प्रकार बहलाऊँ और – कैसे मूर्खता को थामे रहूँ, जब तक मालूम न करूँ कि वह अच्छा काम कौन सा है जिसे मनुष्य जीवन भर करता रहे।
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मोहब्बत का एहसास तो हम दोनों को हुआ था
फर्क सिर्फ इतना था की उसने किया था और मुझे हुआ था
नज़रों से देखो तोह आबाद हम हैं
दिल से देखो तोह बर्बाद हम हैं
जीवन का हर लम्हा दर्द से भर गया
फिर कैसे कह दें आज़ाद हम हैं
बातें तो सब करते है देखा किसी ने नहीं
चाहत है या दिल्लगी या यूँ ही मन भरमाया है,
याद करोगे तुम भी कभी किससे दिल लगाया है।


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